Saturday, April 6, 2013

ठिठके कदम

ठिठके कदम 
हताहत हुए 
दिवंगत कदम 
ठोकर खाते हुए 
सीमाओं को लांघते 
ठिठके कदम .......

स्वयं की प्रीत
कम्पन करती 'लोक ' नीति 
'लोक' 'तंत्र' से भयभीत 
ग्रंथों के विपरीत 
बाहुबलियों की रण नीति 
ठिठके कदम ...... 
 

1 comment:

  1. रोचक व रमणीय पंक्तियां
    हमारे ब्‍लॉग पर भी आपका स्‍वागत है । सधन्‍यवाद ।

    ReplyDelete